Nadiya Ke Paar

Awesome Movie! Awesome Muzik!

Starring Sachin & Sadhana Singh, Released in 1982, Music & Lyrics by Ravindra Jain

कौन दिसा में लेके चला रे बटुहिया

Singer (s): Hemlata, Jaspal Singh

कौन दिसा में लेके चला रे बटुहिया – (३)
ठहर ठहर, ये सुहानी सी डगर
ज़रा देखन दे, देखन दे
मन भरमाये नयना बाँधे ये डगरिया – (२)
कहीं गए जो ठहर, दिन जायेगा गुज़र
गाडी हाँकन दे, हाँकन दे, कौन दिसा…

पहली बार हम निकले हैं घर से, किसी अंजाने के संग हो
अंजाना से पहचान बढ़ेगी तो महक उठेगा तोरा अंग हो
महक से तू कहीं बहक न जाना – (२)
न करना मोहे तंग हो, तंग करने का तोसे नाता है गुज़रिया – (२)
हे, ठहर ठहर, ये सुहानी सी डगर
ज़रा देखन दे, देखन दे, कौन दिसा…

कितनी दूर अभी कितनी दूर है, ऐ चंदन तोरा गाँव हो
कितना अपना लगने लगे जब कोई बुलाये नाम हो
नाम न लेतो क्या कहके बुलायें – (२)
कैसे करायें काम हो, साथी मितवा या अनाड़ी कहो गोरिया – (२)
कहीं गये जो ठहर, दिन जायेगा गुज़र
गाड़ी हाँकन दे, हाँकन दे, कौन दिसा…

ऐ गुंजा, उस दिन तेरी सखियाँ, करती थीं क्या बात हो?
कहतीं थीं तोरे साथ चलन को तो, आगे हम तोरे साथ हो
साथ अधूरा तब तक जब तक – (२)
पूरे ना हो फ़ेरे साथ हो, अब ही तो हमारी है बाली रे उमरिया – (२)
ठहर ठहर, ये सुहानी सी डगर
ज़रा देखन दे, देखन दे, कौन दिसा…

जब तक पूरे ना हों फेरे सात

Singer (s): Hemlata

जब तक पूरे ना हों फेरे सात
तब तक दुल्हन नहीं दुल्हा की
रे तब तक बबुनी नहीं बबुवा की, ना, जब तक …

१) अभही तो पहुना पहली भंवर पड़ी है
अभीं तो दिल्ली दूर खड़ी है
हो पहली भंवर पड़ी है दिल्ली दूर खड़ी है
सात फेरे सात जन्मों का साथ, जब तक पूरे ना …

२) जैसे जैसे भँवर पड़े मन अपनों को छोड़े
एक एक भाँवर नाता अन्जानों से जोड़े
मन घर अपनों को छोड़े, अन्जानों से नाता जोड़े
सुख की बदरी आँसू की बरसात, जब तक पूरे ना …

गुँजा रे चन्दन हम दोनो मैं दोनो खो गए

Singer (s): Hemlata, Suresh Wadkar

गुँजा रे …
गुँजा रे … चन्दन चन्दन चन्दन …
हम दोनो में दोनो खो गए
देखो एक दूसरे के हो गए
राम जाने वो घड़ी कब आएगी जब
होगा हमारा गठबँधन, गुँजा रे …

१) हो सोना नदी के पानी हिलोर मारे
प्रीत मनवा मा हमरी जोर मारे
है ऐसन कइसन होई गवारे, राम जाने, हो राम जाने वो …

२) तेरे सपनों मैं डूबी रहे आँखें
तेरे खुशबू से महक उठी रातें
रंग तेरे पाँव का लग के मेरे पाँव कहें
हर दिन बीते तेरे रँगों की छाँव में
हो, बूढ़े बरगद की माटी को सीस धर ले
दीपा सत्ती को सौ सौ प्रणाम कर ले
ओ देगी आसीस तो जल्‍दी बियाहेगी राम जाने,
राम जाने, हो वो घड़ी …

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~ by Rajeev on January 18, 2007.

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